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भारत में लगभग 60 से 70 प्रतिशत लोग लैक्टोज पाचन न होने की समस्या से ग्रस्त होते हैं। उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिणी भारत की स्वस्थ आबादी में इसकी संख्या अधिक है। उत्तर भारतीयों में समस्या कम होने का कारण यह है कि वे आर्यों के वंशज रहे हैं जो लंबे समय तक दुग्ध उत्पादन करते थे और लैक्टोज पचाने में सक्षम माने जाते हैं। इसलिए, यह आनुवंशिक मिश्रण उनके शरीर में लैक्टोज का पाचन होने में लाभदायक है।

पूरे विश्व में लैक्टोज अवशोषण के लिए यूरोप के व्यक्तियों का प्रतिशत सबसे अधिक है। अफ्रीकी, एशियाई, अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्तियों में लैक्टोज अवशोषण की आवृत्ति कम होती है और उनके कम आयु में इससे प्रभावित होने की संभावना अधिक होती है। हमारी आयु बढ़ने के साथ ही अवशोषण क्षमता घटती जाती है। यह वृद्धावस्था में सबसे कम होती है।